📌 मुख्य समाचार
नेशनल कमीशन फॉर अलाइड हेल्थकेयर भारत सरकार की चेयरपर्सन डॉ. यगना उन्मेष शुक्ला एवं सचिव श्री अरविन्द कुमार के साथ जे.एफ.एम.एल.टी. इंडिया एसोसिएशन की बैठक आयोजित हुई।

इस बैठक में मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट से सम्बंधित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। प्रमुख रूप से यह मांग रखी गई कि:
- मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट को बेसिक मेडिकल लैब का रजिस्ट्रेशन उनके नाम से करने का अधिकार मिले।
- बेसिक लैब की रिपोर्ट्स पर लैब टेक्नोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर से रिपोर्ट जारी करने हेतु नियम बनाया जाए।
- शैक्षणिक योग्यता प्रोफेशनल्स कौंसिल द्वारा तय की जाए।

📌 बैठक में उठाए गए प्रमुख मुद्दे
- राष्ट्रीय महासचिव डॉ. संतोष कुमार यादव ने सभी राज्यों में अलाइड हेल्थ केयर कौंसिल के गठन में हो रही देरी पर चिंता जताई।
- उन्होंने यह भी कहा कि कई कॉलेज व संस्थान आर्ट्स एवं कॉमर्स से बारहवीं उत्तीर्ण विद्यार्थियों को मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी कोर्स में एडमिशन दे रहे हैं, जो सरासर गलत है।
- बैठक में कहा गया कि ऑटोमैटिक एनालाइजर द्वारा आने वाली रिपोर्ट्स को लैब टेक्नीशियन बिना डॉक्टर के सिग्नेचर के जारी कर सकता है, और आवश्यकता पड़ने पर डॉक्टर केवल काउंटर-सिग्नेचर कर सकते हैं।

📌 राज्यों से आए प्रतिनिधियों की भागीदारी
बैठक में महाराष्ट्र, पंजाब, झारखंड, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, दिल्ली, कर्नाटक, बिहार, वेस्ट बंगाल, हरियाणा आदि राज्यों से आए पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया।
सभी ने मिलकर बेसिक लैब रिपोर्ट्स पर लैब टेक्नोलॉजिस्ट के हस्ताक्षर को मान्यता देने और गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु NABL के अंतर्गत लाने की मांग रखी।
📌 संगठन की चिंता
राष्ट्रीय अध्यक्ष मनोज यादव ने कहा कि आज भी भारत के कई राज्यों में नॉन-टेक्निकल व्यक्तियों द्वारा पैथोलॉजी लैब चलाई जा रही हैं, जिनके पास न तो क्लीनिकल इस्टैब्लिशमेंट एक्ट का रजिस्ट्रेशन है और न ही मेडिकल लैब टेक्नोलॉजी की मान्यता प्राप्त डिग्री/डिप्लोमा।
यह स्थिति लैब टेक्नोलॉजिस्ट की छवि और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता दोनों को प्रभावित करती है।